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टीएचएसटीआई में वैज्ञानिक कैरियर Read in English

टीएचएसटीआई की उत्पत्ति

ऐसे दूरदर्शी व्‍यक्ति जो तत्काल सामने आने वाली आवश्‍यक सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं से अवगत थे उन्‍होंने राष्ट्र के समक्ष 2009 में ट्रांसलेशनल स्‍वास्‍थ्‍य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्‍थान के वैचारिक निर्माण में मदद की। स्वास्थ्य देखभाल समाधानों पर तेजी से नज़र रखने पर जोर दिया गया है जो तेजी से विकासशील अर्थव्यवस्था की उन जरूरतों को पूरा करेगा जिसमें स्वास्थ्य देखभाल की कमी थी। टीएचएसटीआई को आधारभूत अनुसंधान से प्राप्त ज्ञान को बेडसाइड और समुदाय के लिए स्थानांतरित करने के लिए अनिवार्य अधिदेश दिया गया था। टीएचएसटीआई अपनी स्थापना के बाद से तीन वर्षों में, एक उत्साह के साथ तेजी से विकसित हुआ है जो शायद ही कभी शिक्षा के क्षेत्रों में देखा जाता है।

टीएचएसटीआई बायोटेक्‍नोलॉजी विभाग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन, भारत सरकार द्वारा एक स्वायत्त संस्थान के रूप में बनाया गया, जो फरीदाबाद में स्थित एनसीआर बायोटेक साइंस क्लस्टर के रूप में ज्ञात संस्थानों के एक उभरते हुए समूह का एक महत्वपूर्ण घटक है। इस क्लस्टर का निर्माण एक महत्वाकांक्षी पहल है जिसका उद्देश्य बहु-विषयक अनुसंधान के संचालन के लिए एक अद्वितीय संस्थागत पारिस्थितिकी तंत्र बनाना है।

टीएचएसटीआई मिशन

टीएचएसटीआई मिशन चिकित्सा, विज्ञान, इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों को अनुवादकीय ज्ञान में एकीकृत करने के लिए है, जिसके परिणामस्वरूप सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए जैव चिकित्‍सा नवाचार सुलभ होंगे और भारत और दुनिया भर में सर्वाधिक वंचित लोगों के स्वास्थ्य में सुधार होगा। सबसे ज्यादा बोझ वाले रोगों पर ध्यान दिया जाएगा।

टीएचएसटीआई संगठनात्मक संरचना

टीएचएसटीआई में एक नेटवर्क संरचना होती है जिसमें व्यक्तिगत कार्यक्रम केंद्र होते हैं जो आपस में जुड़े एक प्रशासनिक प्रबंधन के अंदर कार्य करते हैं। यद्यपि ये केंद्र थीम-विशिष्ट फोकल बिंदुओं का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन वे अपने अंतर-जुड़ाव और वैचारिक रूप से पूर्णता में कार्यक्रमों का अतिरिक्त रूप से कार्यान्वयन और आपसी संवाद करते हैं। टीएचएसटीआई में अनिवार्य रूप से इन स्व-निहित केंद्रों के साथ एक विभागीय संगठनात्मक संरचना का अनुसरण किया जाता है। प्रत्येक केंद्र एक अलग लागत और राजस्व इकाई के रूप में संचालित किया जाता है; इसमें ऐसे कार्यों / विशेषज्ञता को शामिल किया जाता है जो एक विशिष्ट जैव चिकित्‍सा उप-क्षेत्र की दिशा में काम करते हैं; प्रत्येक समूह के अंदर अति-विशेषज्ञता वाले स्‍थान होते हैं और प्रत्यायोजित प्राधिकरण का उपयोग किया जाता है।

टीएचएसटीआई का ऑर्गेनोग्राम

केंद्रों को सेवाओं की बढ़ती संख्या, प्रौद्योगिकी, नीतिगत समर्थन प्लेटफार्मों के लिए नैदानिक विकास और अनुसंधान को समर्थन ‍दिया जाता है। ये नीचे विस्तार से बताए गए हैं और विकास के विभिन्न चरणों में हैं :

  • नैदानिक अनुसंधान प्रबंधन प्रणाली
  • गुड़गांव के सामान्य अस्पताल, जिला हरियाणा में क्लिनिकल रिसर्च यूनिट
  • नैदानिक विकास के लिए उच्च थ्रूपुट लैब
  • बायोटेक विज्ञान क्लस्टर में ट्रांसलेशन प्‍लेटफॉर्म
  • पशु सुविधा
  • उपकरणों और निदान के लिए समर्थन प्रणाली; उत्पाद सत्यापन प्रयोगशाला, एंटीबॉडी इंजीनियरिंग सुविधाएं
  • उन्नत डेटा विश्लेषण
  • जैव भंडार के लिए मूलसंरचना
  • माइक्रोबायोम विश्लेषण के लिए उन्नत प्‍लेटफॉर्म।

टीएचएसटीआई की कार्य शैली

टीएचएसटीआई के कार्यों का प्रबंधन, शासी निकाय के प्रशासन, निर्देशन और मापन, नियमों के अधीन, उपनियम और आदेश के अनुसार किया जाता है। प्रशासनिक और वित्तीय प्रबंधन भारत सरकार के नियमों और दिशानिर्देशों का अनुपालन करते हैं।

संस्थान के दिन-प्रतिदिन के संचालन का प्रबंधन संस्थान की प्रबंधन समिति द्वारा संचालित कार्यात्मक समितियों के एक समूह द्वारा किया जाता है।

मानव संसाधन और अनुसंधान सुविधाओं के प्रबंधन से संबंधित मुद्दे, अंतर और अंतरा-केंद्र दोनों प्रकार के अनुसंधान विषयों को व्यवस्थित करना, संसाधनों का इष्टतम उपयोग, और ऐसे अन्य कार्यों के दक्ष संचालन सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत प्रबंधन समिति द्वारा निरीक्षण किया जाता है।

विनियामक अनुपालन के लिए, संस्थागत मानव एथिक्‍स समिति, संस्थागत पशु एथिक्‍स समिति और संस्थागत जैव सुरक्षा समिति संबंधित अनुसंधान प्रक्रियाओं को निर्देशित करती है।

टीएचएसटीआई का नेतृत्‍व एक वैज्ञानिक विशेषज्ञ सलाहकार समूह (एसएजीई) द्वारा किया जाता है, जो संस्थान के मिशन से जुड़े वैज्ञानिक उत्पादकता और नवाचार को बढ़ाने के लिए संगत मुद्दों पर संस्थान नेतृत्व और संकाय के साथ संलग्‍न है। यह केंद्र या कार्यक्रम विशिष्ट वैज्ञानिक सलाहकार समूहों (एसएजी) द्वारा समर्थित है जो व्यक्तिगत केंद्रों के लिए विशिष्ट कार्यक्रमों के गहन मूल्यांकन के लिए जिम्मेदार हैं। इसके अलावा, केंद्र और / या संस्थानों को जोड़ने वाले सहयोगी या नेटवर्क कार्यक्रमों, विशेष वैज्ञानिक सलाहकार समूहों का गठन किया जाता है जिनमें अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागी शामिल हो सकते हैं। यह उन निरीक्षण समूहों के अतिरिक्त है जो डीबीटी और अन्य निधिकरण एजेंसियों द्वारा स्थापित किए जाते हैं जो हमारे प्रमुख कार्यक्रमों का समर्थन करते हैं।

कार्यक्रम केंद्रों का संचालन और स्थिरता

जैसा कि ऊपर कहा गया है कि केंद्रों में अंतर्निहित विचार एक प्रमुख क्षेत्र के आसपास और अंतर-केंद्र और अंतर-संस्थागत कार्यक्रमों के लिए व्यक्तिगत और टीम के प्रयासों को आगे बढ़ाना है। अब चुनौती अलग अलग इकाइयों के रूप में कार्य करने के बजाय, केंद्रों के बीच स्थिरता और संबद्धता को बनाए रखने की है। स्थिरता के लिए, टीएचएसटीआई के शासी निकाय ने एक तंत्र को मंजूरी दी है, जहां पांच साल की अवधि के अंत में, डीबीटी द्वारा प्रत्येक केंद्र का कठोर बाह्य मूल्यांकन किया जाएगा और कार्यक्रम के वैज्ञानिक तथा गैर वैज्ञानिक कर्मचारियों द्वारा इसे जारी रखने के तर्क, उद्देश्यों और औचित्य के साथ एक नए एसएफसी प्रस्ताव को डीबीटी के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। वैज्ञानिक और गैर-वैज्ञानिक कर्मचारियों को योग्यता और अनुभव के संबंधित स्तर पर उचित नए अनुबंध की पेशकश मिलेगी। केंद्रों की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए, टीएचएसटीआई द्वारा कोर टीएचएसटीआई निधि से कोर संकाय, उपकरण और उपभोज्‍य सामग्रियों के लिए निधियां प्रदान की जाएंगी। एक समवर्ती प्रस्ताव, जैसा कि शासी निकाय द्वारा सुझाया गया है, कार्यक्रम के आगे विस्तार की सुविधा के लिए कम से कम 2-3 कार्यक्रम पदों को कोर संकाय पदों में परिवर्तित करने के लिए मंत्रालय को प्रस्तुत किया जा सकता है।

ट्रांसलेशनल अनुसंधान के मॉडल

टीएचएसटीआई अपने प्रत्येक कार्यक्रम केंद्रों में जैव चिकित्‍सा अनुसंधान में नवाचार की उन्‍नति के लिए ट्रांसलेशनल व्‍यवस्‍था के विभिन्न मॉडलों को प्रयोग और स्थापित करने का प्रयास करता है। ऐसा ही एक मॉडल एक उद्यम मॉडल है जहां समयबद्ध तरीके से परिभाषित लक्ष्यों को प्राप्त करने पर अधिक जोर दिया जाता है। हालांकि इस तरह के दृष्टिकोण से अन्‍वेषकों को जिज्ञासा से प्रेरित शोध के प्रश्‍नों में अपेक्षाकृत कम स्वतंत्रता मिलती है, फिर भी, यह वर्तमान सार्वजनिक-निजी परिदृश्य की अत्यधिक प्रतिस्पर्धी प्रकृति को देखते हुए संगत होता जा रहा है। एक वैकल्पिक मॉडल वह है जिसमें कॉलेजियम एकीकृत संवाद के माध्यम से नवाचार को प्रोत्साहित कि‍या जाता है और लक्षित बुनियादी खोज अनुसंधान के साथ केंद्रों में व्यक्तिगत शोधकर्ताओं को अधिक स्वतंत्रता प्रदान की जाती है। टीएचएसटीआई के लिए, प्रारंभिक वर्षों के लिए एक संतुलित मल्टी-मॉडल ट्रांसलेशनल व्‍यवस्‍था की परिकल्पना की गई है।

विशेष रूप से, प्रक्रिया अनुसंधान और विकास में निम्नलिखित चरणों को शामिल करने के लिए कल्पना की जा सकती है:

  • अनुसंधान एवं विकास के लिए विचार निम्नलिखित तरीकों में से एक में उभर कर आते हैं:
    • व्यक्तिगत वैज्ञानिकों द्वारा
    • संस्थागत , डीबीटी या वैश्विक स्तर पर लैंड स्‍केपिंग के अवसर
    • उद्योग द्वारा विचारों का योगदान देना
    • वैश्विक नेटवर्क में शामिल होने के लिए निमंत्रण
    • इमर्शन फेलोशिप के माध्यम से (उदाहरण बायोडिजाइन)
  • अनुसंधान और विकास नवाचार मार्ग पर अनुसंधान के चरण और प्रकृति पर निर्भर अलग-अलग तरीके से किया जाता है:
    • लक्षित खोज: व्यक्ति या छोटी टीम।
    • प्रारंभिक ट्रांसलेशनल: केंद्र / संस्थानों के अंदर विस्तारित टीम।
    • नैदानिक विकास: अक्सर सार्वजनिक निजी भागीदारी के साथ बड़े अंतर-केंद्र अंतर संस्थागत दल।
    • मेगा कार्यक्रम:बड़ी टीमें, अंतर-संस्थागत, नेटवर्क फंडिंग एजेंसियों की सक्रिय भागीदारी के आधार पर हैं।

टीएचएसटीआई अनुसंधान कार्यक्रम

कार्यक्रम विज्ञान की कार्यनीति और विचारों द्वारा संचालित होते हैं, ये गैर-क्षेत्रीय होते हैं, जो अधिगम चक्र के सृजन और कौशल चक्रों को पूरक करने के लिए टी 1-टी 4 की द्वि-दिशात्मक प्रतिक्रिया लूप द्वारा प्रोत्साहित किए जाते हैं। किसी क्षेत्र पर इसके समग्र प्रभाव को बेहतर ढंग से विषम अनुभाग कार्यक्रम के रूप में सूचित किया जाता है। कार्यक्रम टीएचएसटीआई को एक क्षेत्र में बेहतर संचार और योगदान करने में सक्षम बनाते हैं।

कार्यक्रम बहु-विषयक भी हैं और टीएचएसटीआई में ऐसे कई केंद्र शामिल होते हैं, ये एक कार्यात्मक मैट्रिक्स संरचना को अपनाते हैं। एक विशिष्ट वैज्ञानिक क्षेत्र को संबोधित करने वाले प्रत्येक कार्यक्रम को उनके कार्यात्मक डोमेन पर कई केंद्रों द्वारा एकीकृत योगदान द्वारा विकसित किया जाता है। उदाहरण के लिए, समय अवधि से पहले जन्‍म के कार्यक्रम में पीबीसी, सीएचएमई, सीडीएसए के घटक होते हैं, जो विशेषज्ञता के संबंधित क्षेत्रों में योगदान करते हैं; अन्य गैर-टीएचएसटीआई केंद्रों के साथ सहयोग किया जाता है; लागत और राजस्व प्रबंधन और मूल्यांकन के लिए एक अलग प्रशासन है। लेकिन इस कार्यक्रम के समन्वयक को परियोजना के परस्‍पर कार्यात्मक पक्षों की देखरेख करने के लिए सौंपा गया है, जबकि कार्यकारी या केंद्र प्रमुख अपने संसाधनों और परियोजना क्षेत्रों पर नियंत्रण बनाए रखते हैं।

यह संरचना कई दृष्टिकोणों पर एक साथ ध्यान केंद्रित करती है और एक केंद्र को एक से अधिक नवाचार प्रयासों के लिए उत्तरदायी बनाती है। कई दृष्टिकोणों के इस परिचय से समय सीमा और नवाचार की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है, पर्यावरण से उभरने वाली चुनौतियों के साथ-साथ परिवर्तन और अनुकूलन के लिए संगठन हेतु क्षमता प्रदान की जा सकती है।

ये बहु-केंद्र बहु-विषयात्मक कार्यक्रम संगठन को सामाजिक / व्यक्तिगत संसाधन (उदाहरण व्यक्तिगत नेटवर्क, क्रॉस-फ़ंक्शनल ट्रस्ट और साझा मूल्यों) से लाभान्वित करने में भी सक्षम बनाते हैं जिनसे स्‍थायी नवाचार संचालित किए जाते हैं।

टीएचएसटीआई में, हमारा मानना है कि अनुवाद को बढ़ाने के लिए एक सफल संगठनात्मक संरचना और शासन के लिए कोई 'विशिष्ट' या 'निश्चित' रोडमैप नहीं है। हम पारंपरिक और अपरंपरागत तंत्रों का पता लगाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं जो इस संगठन के भविष्य और इस नए प्रयोग को परिभाषित कर सकते हैं और एक आकार दे सकते हैं।

टीएचएसटीआई संकाय और उनकी वैज्ञानिक और अकादमिक भूमिकाएं

टीएचएसटीआई में संकाय (i) कोर संकाय और (ii) कार्यक्रम संकाय का एक दोहरा कैडर है।

कोर संकाय:

कोर संकायों को कैबिनेट द्वारा अनुमोदित नियमित पदों के लिए कार्य पर रखा जाता है और उन्हें सहायक प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर या प्रोफेसर का पदनाम दिया जाता है। वे अपने अनुसंधान समूहों के समूह लीडर और प्रमुख अन्‍वेषक (पीआई) होते हैं।

योग्यता, वैज्ञानिक और शैक्षणिक जिम्मेदारी, नियुक्ति के बाद कार्यकाल ट्रैक: सहायक प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के रूप में नियुक्ति के लिए, एक गैर-चिकित्सा पृष्ठभूमि वाले प्रत्‍याशी को न्यूनतम क्रमशः 3 वर्ष, 7 वर्ष और 14 वर्ष के एक उपयोगी पोस्ट-डॉक्टरल अनुभव और मेडिकल डिग्री वाले प्रत्‍याशियों के लिए उनके स्‍नातकोत्तर के बाद 3 वर्ष, 7 वर्ष और 14 वर्ष का न्यूनतम अनुभव होना चाहिए, इसके अलावा उनके अनुसंधान अनुभव की व्‍यापकता और गुणवत्ता को परिभाषित करने वाले अन्य मानदंडों को पूरा करने की आवश्यकता होती है। संकाय से उम्मीद की जाती है कि वे अनुसंधान कार्यक्रमों के विकास और नेतृत्व करें, जो टीएचएसटीआई के जनादेश के अंदर टीएचएसटीआई अनुसंधान कार्यक्रम पर अनुभाग में परिभाषित किए गए हैं। उन्‍होंने स्‍वयं की निगरानी में सीधे सलाह देने के लिए पीएच.डी. छात्रों को कार्य सौंपा है। इसके लिए विश्वविद्यालय द्वारा उनकी मान्यता की आवश्यकता होती है, जिसमें पीएच.डी. छात्र पंजीकरण करेंगे।

नियुक्ति का कार्यकाल: वे एक कार्यकाल ट्रैक का पालन करेंगे और नम्‍य पूरक योजना के आधार पर अगले वरिष्ठ पद पर जाएंगे।

कार्यक्रम संकाय :

कार्यक्रम अनुसंधान वैज्ञानिक वे होते हैं जिन्हें एसएफसी द्वारा अनुमोदित अनुसंधान कार्यक्रमों में अनुबंध पर नियुक्त किया जाता है और उन्हें अनुसंधान वैज्ञानिक सी, अनुसंधान वैज्ञानिक डी या अनुसंधान वैज्ञानिक ई के रूप में नामित किया जाता है। कार्यक्रम वैज्ञानिक संकायों को 5 साल की अवधि के लिए या अनुसंधान कार्यक्रम की अवधि के लिए अनुबंध पर लिया जाता है, जो भी पहले हो।

योग्यता, वैज्ञानिक और शैक्षणिक जिम्मेदारी, नियुक्ति का कार्यकाल: अनुसंधान वैज्ञानिक सी के रूप में नियुक्ति के लिए 1-2 वर्ष के पोस्‍ट-डॉक्टरेट अनुभव (या चिकित्सा वैज्ञानिकों के लिए स्‍तनातकोत्तर के बाद 1 वर्ष का अनुभव) की आवश्यकता होती है। अनुसंधान वैज्ञानिक डी और अनुसंधान वैज्ञानिक ई के रूप में नियुक्ति हेतु गैर-चिकित्सा पृष्ठभूमि वाले वैज्ञानिकों के लिए न्यूनतम 3 वर्ष / 7 वर्ष के उपयोगी पोस्‍ट-डॉक्‍टरल अनुभव और उनके स्‍नातकोत्तर के बाद में मेडिकल डिग्री वाले प्रत्‍याशियों के लिए 3 वर्ष / 7 वर्ष के न्यूनतम अनुभव की आवश्यकता होती है। एक वैज्ञानिक सी से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने विशिष्ट अनुसंधान अनुभव को अनुसंधान समूह में लाएं और वरिष्ठ समूह लीडर के साथ कार्य करते हुए अपनी शोध क्षमताओं को व्यापक बनाएं। उनके शोध को अनुसंधान समूह के लिए उपलब्ध संसाधनों द्वारा समर्थन दिया जाता है जहां वे कार्य करते हैं लेकिन अपने शोध का समर्थन करने के लिए अतिरिक्त- अनुदान उत्पन्न कर सकते हैं, बशर्ते कि यह कार्यक्रम के जनादेश के अंदर हो। ऐसी स्थितियों में जहां फंडिंग एजेंसी केवल वैज्ञानिकों डी और इनसे वरिष्‍ठ को पीआई के रूप में मानती है, वे सह-पीआई के रूप में आवेदन कर सकते हैं। अनुसंधान वैज्ञानिक सी को पीएचडी छात्रों को सलाह देने की जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाती है, लेकिन वे टीएचएसटीआई पीएच.डी. छात्रों की सलाहकार समिति के सदस्य हो सकते हैं। एक वैज्ञानिक डी या ई कार्यक्रमों पर स्वतंत्र रूप से कार्य करेगा जो जेआरएफ, एसआरएफ या अनुसंधान सहयोगियों द्वारा सहायता प्राप्त केंद्र के जनादेश के भीतर हैं। उनके प्रदर्शन के आधार पर वैज्ञानिक प्रगति, और वैज्ञानिक क्षमता का प्रबंधन करने की उनकी क्षमता के आधार पर, समूह के नेता द्वारा कम से कम एक वर्ष से अधिक का आकलन किया जाता है, उन्हें उनके समूह के लीडर के साथ सह-मार्गदर्शक के रूप में पीएच.डी. छात्रों को सौंपा जाता है। यदि डिग्री देने वाला विश्वविद्यालय उन्हें स्वतंत्र पीएच.डी. मार्गदर्शक के रूप में पंजीकृत करने की अनुमति देता है तो वे पीएच.डी. छात्रों को मुख्य मार्गदर्शक के रूप में चुन सकते हैं। इस स्तर पर, उन्हें केंद्र के डोमेन क्षेत्रों में पीआई के रूप में अनुदान लेखन के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है।

नियुक्ति का कार्यकाल: इन पदों को 5 वर्ष का पूरा कार्यकाल पूरा करने के लिए पदों को आगे बढ़ाया जाएगा या नहीं, इसे यह तय करने के लिए 2 वर्ष के अंत में कार्यक्रम संकाय की समीक्षा की जाएगी। उनका मूल्यांकन 5 वर्षों के बाद किया जाता है और उनके निष्‍पादन की संतोषजनक समीक्षा के आधार पर और अनुदान के नवीनीकरण के लिए, एक उचित स्तर पर नई संविदा दी जाएंगी, जो समीक्षा समिति द्वारा अनुशंसित उनके पिछले निष्‍पादन और अनुभव के अनुरूप हैं। कार्यक्रम संकाय को मुख्य संकाय में समामेलित करने के लिए एक कठोर मूल्यांकन प्रक्रिया के माध्यम से भी माना जा सकता है जैसा कि अन्य मुख्य संकाय की भर्ती के लिए किया जाता है। यह निहित है कि सभी वैज्ञानिक नियुक्तियों के लिए निष्‍पादन मूल्यांकन मानदंड सौंपे गए पद के स्तर और वैज्ञानिक और शैक्षणिक उत्पादन के स्तर पर सामान्य अपेक्षाओं को ध्यान में रखेगा। जहां निष्‍पादन की समीक्षा अपेक्षा के अनुरूप नहीं है, उपरोक्त में से किसी भी ट्रैक के माध्यम से नियुक्त किए गए वैज्ञानिक को संविदा पर एक साल का विस्तार दिया जा सकता है ताकि वे अपने कार्य को पूरा कर सकें और अन्य मार्ग की तलाश कर सकें।

परियोजना वैज्ञानिक

जैसा कि ऊपर बताया गया है, दो प्रकार के संकाय के अलावा, परियोजना वैज्ञानिक और वरिष्ठ परियोजना वैज्ञानिक एक प्रधान अन्‍वेषक के नेतृत्व वाले एक बाह्य वित्त पोषित अनुसंधान कार्यक्रम का हिस्सा हैं। उनके शोध को अनुसंधान परियोजनाओं के लिए उपलब्ध संसाधनों द्वारा समर्थन दिया जाता है जहां वे कार्य करते हैं और इसलिए, उनके शोध का समर्थन करने के लिए बाह्य अनुदान अर्जित करने की आवश्यकता नहीं है। इन वैज्ञानिकों को उनकी प्रगति और समूह के लीडर द्वारा आवश्यकताओं के आकलन के आधार पर एक जेआरएफ या एक तकनीशियन के साथ समर्थन दिया जा सकता है। नैदानिक परियोजनाओं में समकक्ष पद चिकित्सा अनुसंधान अधिकारी, वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारी और नैदानिक समन्वयक के होते हैं। इन चिकित्सा अधिकारियों को फील्‍ड स्‍टाफ, नर्स और तकनीशियनों द्वारा समर्थन दिया जाता है। इन वैज्ञानिकों / अनुसंधान अधिकारियों / वरिष्ठ अनुसंधान अधिकारियों / नैदानिक समन्वयकों को पीएच. डी. छात्रों को सलाह देने की जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाती है, लेकिन वे टीएचएसटीआई के पीएच. डी. छात्रों की सलाहकार समिति के सदस्य हो सकते हैं। इन वैज्ञानिक नियुक्तियों के लिए निष्‍पादन के मूल्यांकन मानदंड में सौंपी गई जिम्मेदारी, धारित पद के स्‍तर पर सामान्य अपेक्षाओं, और वैज्ञानिक और अकादमिक उत्पादन को ध्यान में रखा जाएगा। उनकी अनुबंध की शर्तों को टीएचएसटीआई प्रशासन द्वारा नियंत्रित किया जाएगा।

संकाय और वैज्ञानिक के लिए अनुसंधान के मापन योग्‍य परिणाम :


  • रोग जीव विज्ञान की अंतर्दृष्टि :
    • रोग तंत्रों का ज्ञान
    • नए चिकित्सा विज्ञान के लिए लक्ष्य
    • निदान और हस्तक्षेप की ओर गतिशील
    • परिणाम आम तौर पर प्रारंभिक रूपांतरण (ट्रांसलेशन) के लिए प्रकाशन और विचार हैं।
  • प्रारंभिक रूपांतरण (ट्रांसलेशन)
    • उत्पाद नवाचार के लिए कदम बढ़ाना है या नहीं, इसका निर्णय लेने के लिए सिद्धांत का प्रमाण।
    • अनुसंधान और विकास के लिए नए उपकरण, कई प्रत्‍याशियों के चयन के लिए बायोमार्कर, लीड यौगिक, अनुकूलित यौगिक, संभावित प्रतिरक्षी, अनुसंधान के लिए स्पिनऑफ के रूप में पशु मॉडल।
  • विलंबित ट्रांसलेशन
    • यह लक्षित खोज या बाहरी ज्ञान से शुरुआती लीड के लिए पहले चरण I के परीक्षणों तक विस्‍तारित है।
    • संभावित प्रत्‍याशी – प्रायोगिक समूह, आविष विज्ञान, निरंतर नेतृत्व अनुकूलन, फार्मेको-काइनेटिक्स, नए परिणामों के साथ सिद्धांत का विस्तारित प्रमाण।
  • भागीदारी के तहत नैदानिक विकास
    • द्वितीय चरण, तृतीय परीक्षण
    • विपणन के बाद निगरानी
  • सस्ती तकनीक के प्रसार के लिए नीति
  • अन्य उत्‍पाद :
    • चिकित्सक वैज्ञानिकों का विकास
    • देश में चिकित्सा और औषधि ट्रांसलेशन विज्ञान का प्रभाव
    • संकाय की उद्यमशीलता के प्रयास के माध्यम से या उद्योग के सहयोग से किफायती उत्पादों और प्रौद्योगिकी का विकास करना।

अन्य शैक्षिक कार्यक्रम

चिकित्सकों के लिए विज्ञान में परास्नातक (आरसीबी के सहयोग से)

चिकित्‍सा विज्ञान कार्यक्रम में परास्नातक एक संक्रमणकालीन कार्यक्रम के रूप में विकसित किया जा रहा है जो चिकित्सीय और / या ट्रांसलेशनल दोनों के लिए जैव चिकित्‍सा अनुसंधान से संबंधित क्षेत्रों के चिकित्सा पृष्ठभूमि के व्यक्तियों के लिए, व्यापक, अंतःविषयक जानकारी देता है। यह टीएचएसटीआई के सहयोग से आरसीबी का एक महत्वपूर्ण प्रमुख कार्यक्रम होगा। संबंधित विशेषज्ञ समूह समितियां बनाई गई हैं और कार्यक्रम के विवरण पर चर्चा की जा रही है।